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Book Summary
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मेला संवेदनशील व्यक्ति की गहरी अनुभूति के दर्द से पोषित होकर स्वतः ही हृदय से स्फुटित अभिव्यक्तियों का संग्रह है। प्रस्तुत कविताएं कभी प्रगतिशील चेतना को मुखरित करती हंै तो कभी आदर्शवाद की दुहाई देती हैं। कभी क्रांति का झण्डा बन फहराती हैं तो कभी अहिंसा का चोला पहन शान्त, स्थिर हो अपनी ही आत्मा की तलाश शुरू करती हैं। इनमें से बहुत सी कविताओं का प्रकाशन विभिन्न पत्रिकाओं में होता रहा है। लेखक की यथार्थवादी शैली पाठक को अपने से जोड़ने में सक्षम है। कहीं यह आपकी अपनी अभिव्यक्ति तो नहीं ?
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